प्रदेशभर में पहली बार आयोजित पहल, बंदियों को मिला त्वरित और सुलभ न्याय...!
इंदौर। मध्यप्रदेश में न्याय व्यवस्था को और अधिक सुलभ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के तहत आयोजित विशेष जेल लोक अदालत में जिला इंदौर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। इंदौर ने विभिन्न श्रेणियों के कुल 57 प्रकरणों का सफल निराकरण कर प्रशासनिक दक्षता और संवेदनशील दृष्टिकोण का परिचय दिया।
यह विशेष जेल लोक अदालत पूरे प्रदेश में पहली बार आयोजित की गई, जिसका उद्घाटन केंद्रीय जेल ग्वालियर से मुख्य न्यायाधीश श्री न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा द्वारा किया गया। इस अवसर पर उच्च न्यायालय के कई वरिष्ठ न्यायाधीश एवं न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश श्री संजीव सचदेवा ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म से अपराधी नहीं होता, बल्कि परिस्थितियाँ उसे उस दिशा में ले जाती हैं। उन्होंने बंदियों को आत्मचिंतन, सुधार और नए जीवन की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने लोक अदालत को केवल विवाद निपटान का मंच नहीं, बल्कि नई शुरुआत का अवसर बताया।
कार्यक्रम में न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि यह पहल बंदियों को न्याय के करीब लाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने वर्ष 2047 तक विवाद-मुक्त समाज के निर्माण का लक्ष्य सामने रखते हुए सभी से योगदान देने की अपील की।
इस विशेष आयोजन में प्रदेशभर के न्यायिक अधिकारी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जेल अधीक्षक एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से भी जुड़े।
इंदौर की सफलता के पीछे पुलिस कमिश्नरेट का मानवीय दृष्टिकोण भी अहम रहा। गिरफ्तार एवं बंदी बनाए गए व्यक्तियों की क्षमा-याचना पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उनकी समयबद्ध रिहाई और समाज में पुनर्स्थापन सुनिश्चित किया गया।
लोक अदालत में प्ली बार्गेनिंग, आपराधिक शमनीय प्रकरण, लघु अपराध, संक्षिप्त प्रकरण, दीवानी एवं वैवाहिक मामलों सहित विभिन्न श्रेणियों के मामलों का निपटारा किया गया, जिससे बड़ी संख्या में बंदियों को राहत मिली।
यह पहल न केवल लंबित प्रकरणों के त्वरित निपटारे में सहायक सिद्ध हुई, बल्कि न्याय व्यवस्था को जेल परिसर तक पहुँचाकर बंदियों के लिए एक नई उम्मीद भी लेकर आई।
