⚡ जहां ADG, IG, AIG और जोनल SP भी नहीं करते इस्तेमाल… वहां डीएसपी पर बत्ती ने खड़े किए सवाल
⚡ DSP योगेंद्र सिंह चोकर से जुड़ा ‘बत्ती’ मामला पहुंचा शीर्ष स्तर तक, लेकिन सन्नाटा कायम..!
⚡ उच्च अधिकारियों तक पहुंची जानकारी, प्रतिक्रिया का इंतजार..!
शहडोल। जिले पुलिस की गोपनीय शाखा, जो अपने शांत और लो-प्रोफाइल कामकाज के लिए जानी जाती है, अब एक ऐसे मुद्दे को लेकर चर्चा में है। जिसने विभागीय नियमों और परंपराओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शाखा में पदस्थ एक डीएसपी स्तर के अधिकारी योगेंद्र सिंह चोकर की गाड़ियों में लाल-नीली बत्ती के उपयोग को लेकर हलचल तेज हो गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित अधिकारी द्वारा उपयोग किए जा रहे वाहन—चाहे सरकारी हों या निजी—दोनों में बत्ती लगाए जाने की बात सामने आ रही है। यह स्थिति इसलिए भी चौंकाने वाली मानी जा रही है क्योंकि गोपनीय शाखा में कार्यरत अधिकारियों से सामान्यतः सादगी और गोपनीयता बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश,
देश और प्रदेश में लागू नियम स्पष्ट रूप से बताते हैं कि लाल या नीली बत्ती का उपयोग केवल आपातकालीन सेवाओं तक सीमित है, जिनमें विशेष परिस्थितियों में पुलिस, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद VIP वाहनों में बत्ती के उपयोग पर भी सख्त रोक लगाई जा चुकी है।
इंटेलीजेंस की परंपराओं के विपरीत DSP के ठाठबाठ
इसी संदर्भ में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रदेश स्तर पर ADG, IG, AIG और जोनल SP जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी सामान्य परिस्थितियों में बत्ती का उपयोग नहीं करते, तो फिर गोपनीय शाखा में इस तरह का उपयोग किस आधार पर किया जा रहा है। गोपनीय शाखा की प्रकृति को देखते हुए यह मुद्दा और भी गंभीर हो जाता है। इस शाखा का कार्य खुफिया सूचनाओं का संकलन और विश्लेषण करना होता है, जहां अधिकारियों की पहचान और गतिविधियों को सार्वजनिक प्रदर्शन से दूर रखा जाना जरूरी होता है। ऐसे में वाहनों पर बत्ती लगाकर चलना न केवल नियमों के विपरीत माना जा सकता है, बल्कि शाखा की मूल कार्यप्रणाली से भी मेल नहीं खाता।
🚗 दोनों वाहनों पर सवाल
जिन वाहनों का जिक्र किया गया है, उनमें:
एक सरकारी वाहन (MP-03-A-5616)
एक निजी वाहन (DL-8-CZ-2590)
शामिल हैं। आरोप है कि दोनों में ही बत्ती का उपयोग किया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है।
वरिष्ठ अफसरो के प्रतिक्रिया कब, क्या होगी कार्यवाई
फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन जिस तरह से यह मुद्दा चर्चा में आया है, उसने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या नियमों का पालन सभी स्तरों पर एक समान तरीके से हो रहा है या फिर कुछ मामलों में अपवाद बनते जा रहे हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मुद्दे को विभाग किस नजरिए से देखता है और क्या इसे सिर्फ एक सामान्य मामला मानकर नजरअंदाज किया जाता है या फिर नियमों के अनुरूप स्पष्टता लाई जाएगी।
सरकारी संसाधनों के उपयोग पर भी उठे सवाल
मामले में सिर्फ बत्ती का उपयोग ही नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के संभावित दुरुपयोग के भी आरोप लगाए गए हैं।
सरकारी वाहन का उपयोग निजी कार्यों में किए जाने की बात कही गई है। विभागीय कार्य का हवाला देकर सिंगरौली आवागमन के आरोप। वाहन उपयोग और ईंधन (डीजल) खर्च को लेकर अनियमितताओं की आशंका। सूत्रों का दावा है कि इस संबंध में तकनीकी और दस्तावेजी प्रमाण भी संकलित किए गए हैं, हालांकि इनकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
हाई लेवल तक पहुंची जानकारी, लेकिन अब तक सन्नाटा
गोपनीय शाखा से जुड़े DSP योगेंद्र सिंह चोकर की काले कारनामे की जानकारी अब उच्च स्तर तक भेजी जा चुकी है। बताया जा रहा है कि यह विषय डीजीपी कैलाश मकवाना, एडीजी इंटेलिजेंस साई मनोहर और मुख्य सचिव अनुराग जैन तक पहुंचाया गया है।
हालांकि, अभी तक योगेंद्र सिंह चोकर से जुड़े मामले में किसी भी प्रकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया, निर्णय या कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे मामले को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।
