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गोपनीय शाखा में ‘सेटिंग पोस्टिंग’ का खुलासा, आदेश की कॉपी संदिग्ध

 
➡️ गोपनीय शाखा में सेटिंग,बिना ट्रेनिंग आरक्षक की एंट्री..! 
➡️  पुलिस में बड़ा खेल EXPOSE, ऑर्डर की कॉपी से खुलासा..! 
➡️ DSP पर बड़े आरोप, गोपनीय शाखा में गड़बड़..! 

शहडोल। जिले मे पुलिस की गोपनीय शाखा में विवादित तैनाती को लेकर अब बड़ा खुलासा हुआ है। सामने आई आदेश की आधिकारिक कॉपी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। दस्तावेज़ के अनुसार, आरक्षक क्रमांक 564 शानू कुमार पाण्डेय को विशेष शाखा (गोपनीय शाखा), जिला शहडोल में कार्य हेतु संबद्ध किया गया है।

 कब और कैसे हुआ आदेश?
यह आदेश 28 सितंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय, शहडोल से जारी किया गया। आदेश में उल्लेख है कि आरक्षक ने 26 सितंबर 2025 को आवेदन देकर पारिवारिक कारण—पत्नी की अस्वस्थता और पिता के स्वास्थ्य—का हवाला देते हुए विशेष शाखा में पदस्थापना की मांग की थी। इसी आधार पर उसे अस्थायी रूप से गोपनीय शाखा में अटैच कर दिया गया।

 लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होते हैं…
गोपनीय शाखा जैसी अति संवेदनशील इकाई में तैनाती के लिए जहां अमनि गुप्तवार्ता की स्वीकृति और विशेष प्रशिक्षण अनिवार्य होता है, वहीं इस आदेश में ऐसी किसी प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। यही नहीं, सूत्रों का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे गोपनीय शाखा में पदस्थ कार्यवाहक उप पुलिस अधीक्षक योगेंद्र सिंह की भूमिका संदिग्ध है। आरोप है कि उन्होंने नियमों की पूरी जानकारी उच्च अधिकारियों तक सही तरीके से नहीं पहुंचाई और तैनाती करवा दी।

 नियम दरकिनार या अंदरूनी ‘मैनेजमेंट’?
➡️ सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ एक आवेदन के आधार पर इतनी संवेदनशील शाखा में पोस्टिंग दी जा सकती है?
➡️क्या बिना प्रशिक्षण के आरक्षक को गोपनीय सूचनाओं तक पहुंच देना नियमों का उल्लंघन नहीं है?
➡️ क्या इस पूरी प्रक्रिया में किसी प्रकार की ‘सेटिंग’ या दबाव काम कर रहा था?

 सुरक्षा पर सीधा खतरा
विशेषज्ञ मानते हैं कि गोपनीय शाखा में बिना प्रशिक्षित व्यक्ति की तैनाती न केवल विभागीय लापरवाही है, बल्कि यह सूचना लीक और सुरक्षा जोखिम को भी जन्म देती है। ऐसी शाखाओं में एक छोटी चूक भी बड़े स्तर पर कानून-व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

 अब जिम्मेदारी तय होगी या फिर मामला दबेगा?
आदेश की कॉपी सामने आने के बाद अब यह मामला सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दस्तावेजी साक्ष्य के साथ गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।  अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला भी बाकी मामलों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा।

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