➡️ मल्टी, फ्लैट, होटल और कमर्शियल इलाकों में फैलता सेक्स रैकेट… आखिर किसके संरक्षण में चल रहा यह खेल?
➡️ फ्रेंडशिप से फाइव स्टार तक का काला सफर, गर्लफ्रेंड कल्चर या गुनाह का नया नेटवर्क?
➡️ कई TI सेक्स रैकेट का लेते है पैसा, और खुद स्तेमाल करते हैं नई उम्र की लड़कियां?
➡️ पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह की आंखों के सामने इंदौर में “रंगीन खेल” का नेटवर्क फैलता रहा और थाना स्तर का सिस्टम सिर्फ तमाशबीन बना रहा। सवाल अब यह है कि आखिर पुलिस अमला अपराध रोक रहा है… या अपराधियों को खुली छूट दे रहा है?
इंदौर। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर आज सिर्फ विकास, मेट्रो, हाईराइज बिल्डिंग और स्मार्ट सिटी की चमक तक सीमित नहीं रह गई है। शहर के कई हिस्सों में तेजी से फैल रहे अवैध सेक्स रैकेट, ड्रग्स नेटवर्क और “सेक्स कल्चर” ने अब सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक शहर के कई पॉश और कमर्शियल इलाकों में किराए के फ्लैट, मल्टी, डुप्लेक्स और होटल अब “रंगीन धंधों” के सुरक्षित अड्डे बनते जा रहे हैं।
किन इलाकों में सबसे ज्यादा चर्चा?
शहर के महालक्ष्मी नगर, चंदन नगर, स्कीम नं 78 और गुलाब बाग कॉलोनी जैसे इलाकों को लेकर लगातार चर्चाएं सामने आती रही हैं कि यहां देर रात तक संदिग्ध गतिविधियां संचालित होती हैं।
बताया जाता है कि कई मल्टी और फ्लैटों में बाहर से आने वाले युवाओं और युवतियों को “फ्रेंडशिप”, “पार्टी”, “मॉडलिंग”, “इवेंट” और “हाई प्रोफाइल लाइफ” के नाम पर जोड़ा जाता है। धीरे-धीरे यह नेटवर्क देह व्यापार, ब्लैकमेलिंग और ड्रग्स सप्लाई जैसे अपराधों तक पहुंच जाता है।
पढ़ाई और नौकरी के नाम पर फंसती युवतियां
इंदौर जैसे बड़े शहर में हर साल हजारों छात्र और नौकरीपेशा युवा बाहर से आते हैं। इनमें कई लड़कियां ऐसी होती हैं जो आर्थिक तंगी, अकेलेपन या जल्दी पैसे कमाने के लालच में गलत लोगों के संपर्क में आ जाती हैं। सूत्रों के मुताबिक कई दलाल सोशल मीडिया, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए युवतियों से संपर्क करते हैं। शुरुआत “पार्ट टाइम जॉब”, “इवेंट मैनेजमेंट”, “कैफे मीटअप” या “फ्रेंडशिप सर्कल” से होती है, लेकिन बाद में उन्हें ऐसे रास्तों में धकेल दिया जाता है जहां से बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है।
होटलों तक सप्लाई… दलालों का पूरा नेटवर्क एक्टिव
स्थानीय चर्चाओं के अनुसार शहर के कई छोटे-बड़े होटलों तक लड़कियों की सप्लाई करवाई जाती है। इसमें कथित दलाल, एजेंट और कुछ होटल संचालकों की मिलीभगत की बातें भी सामने आती रही हैं। कहा जाता है कि “कॉल सिस्टम” के जरिए ग्राहक तक युवतियों को पहुंचाया जाता है और पूरा नेटवर्क मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया और प्राइवेट चैट एप्स के माध्यम से संचालित होता है।
सबसे बड़ा सवाल — पुलिस आखिर कर क्या रही है?
अब सवाल सीधे इंदौर पुलिस और उसके अधिकारियों पर उठने लगे हैं।
पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह के नेतृत्व वाली पुलिस व्यवस्था पर लोग सवाल कर रहे हैं कि अगर शहर में इतना बड़ा नेटवर्क सक्रिय है तो कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती?
जनता पूछ रही है —
क्या थाना स्तर पर किराएदारों का सत्यापन होता है?
क्या होटलों के रिकॉर्ड की नियमित जांच होती है?
क्या कमर्शियल इलाकों में संदिग्ध फ्लैटों की निगरानी की जाती है?
आखिर DCP, ACP, और थाना प्रभारियों की जवाबदेही कब तय होगी?
“सेटिंग सिस्टम” का आरोप क्यों लग रहा है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई जगह थाना स्तर पर “सेटिंग संस्कृति” इतनी मजबूत हो चुकी है कि अवैध धंधे चलाने वालों के हौसले बुलंद हैं।bलोगों का कहना है कि छोटी-मोटी कार्रवाई दिखाकर बड़े नेटवर्क को बचा लिया जाता है। कई मामलों में शिकायतों के बावजूद गहराई से जांच नहीं होती। यही वजह है कि शहर में ड्रग्स, देह व्यापार और “सेक्स नेटवर्क” लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
किराएदार वेरिफिकेशन की सबसे बड़ी कमजोरी
विशेषज्ञों का मानना है कि इंदौर में सबसे बड़ी समस्या बिना सत्यापन के किराएदार रखना है। हजारों लोग मल्टी और फ्लैटों में रह रहे हैं, लेकिन उनके दस्तावेजों की जांच और पुलिस रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया बेहद कमजोर मानी जाती है।
अगर हर थाना क्षेत्र में सख्ती से किराएदार वेरिफिकेशन, होटल चेकिंग और डिजिटल निगरानी लागू की जाए, तो काफी हद तक ऐसे अपराधों पर रोक लग सकती है।
युवाओं का भविष्य या अपराध का जाल?
इंदौर को शिक्षा, व्यापार और संस्कारों का शहर कहा जाता है। लेकिन अगर इसी शहर में पढ़ने और करियर बनाने आए युवा अपराध, शोषण और अवैध नेटवर्क में फंसने लगें, तो यह केवल कानून व्यवस्था की नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता मानी जाएगी।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और पुलिस इस गंभीर मुद्दे पर सिर्फ औपचारिक बयान देती है… या सच में उन “रंगीन अंधेरों” पर बड़ी कार्रवाई करती है, जिनकी चर्चा आज पूरे शहर में हो रही है।
