कभी गुस्से, गाली और सत्ता के गलियारों में जुगाड़ के लिए मशहूर रहे साहब..! अब जनता के बीच मुस्कुराते, हाथ जोड़ते और संवेदनशील अफसर बनने में जुटे हैं..! विंध्य में नई पोस्टिंग क्या मिलीसाहब ने पूरी “छवि बदलो अभियान” ही शुरू कर दिया..! अब सवाल सिर्फ इतना है कि ये बदलाव दिल से है या फिर सिस्टम के हिसाब से पहना गया नया प्रशासनिक मुखौटा?
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार के एक चर्चित कलेक्टर इन दिनों विंध्य क्षेत्र में जमकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। जनता के बीच सक्रियता, ताबड़तोड़ निरीक्षण, संवेदनशील अफसर की छवि और “जनहितैषी प्रशासन” का नया चेहरा… हर तरफ सिर्फ उनकी ही चर्चा है। लोग कह रहे हैं — “अरे वाह कलेक्टर साहब… वाह!”
लेकिन साहब की कहानी सिर्फ इतनी सीधी भी नहीं है।
प्रशासनिक गलियारों में उनके पुराने किस्से भी कम मशहूर नहीं हैं। मालवा, बुंदेलखंड, नर्मदापुरम संभाग से लेकर अब विंध्य तक कई जिलों में कलेक्टर रह चुके ये प्रमोटी IAS अफसर सिस्टम के ऐसे खिलाड़ी माने जाते हैं, जिन्हें सत्ता के दरबार में “जुगाड़ का उस्ताद” कहा जाता है।
बताया जाता है कि काम निकलवाने के लिए बड़े-बड़े माननीयों के यहां दंडवत लगाने में भी इन्हें कोई संकोच नहीं होता।
सूत्रों की मानें तो एक रिटायर्ड IAS अधिकारी ने यहां तक कह दिया था कि “साहब की पोस्टिंग यूं ही नहीं होती… बड़े माननीयों को खुश रखने की कला इन्हें खूब आती है।”
कहा तो यह भी जाता है कि किसी बड़े नेता का आलीशान मकान बनवाने में भी इनकी अहम भूमिका रही।
इनकी कार्यशैली पर सवाल पहले भी उठते रहे हैं।
जहां रहे, वहां “डकैती डालने वाली प्रशासनिक शैली” की चर्चा खूब हुई। मतलब… हर जगह अपना प्रभाव, अपना फायदा और अपना नेटवर्क मजबूत करने की कोशिश। एक पुराना किस्सा आज भी अफसरशाही के गलियारों में फुसफुसाहट बनकर घूमता है।
जब महाकाल मंदिर में दर्शन के दौरान साहब का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया था। बताया जाता है कि वहां विवाद इतना बढ़ा कि एक पुलिसकर्मी से हाथापाई जैसी स्थिति बन गई और साहब की जमकर किरकिरी हुई।
साहब का स्वभाव भी कम दिलचस्प नहीं बताया जाता।
अपने अलावा किसी को ज्यादा बुद्धिमान नहीं मानना, फायदे के लिए कहीं भी पहुंच जाना, और जरूरत पड़ते ही रंग बदल लेना… ये उनकी पहचान मानी जाती रही है।
लेकिन कहानी में ट्विस्ट अब आया है।
विंध्य में नई पदस्थापना के बाद अचानक साहब का अंदाज बदल गया। जो अफसर कभी गुस्से, गाली-गलौज और अड़ियल रवैये के लिए मशहूर था, वही अब जनता के बीच मुस्कुराते हुए दिखाई दे रहा है। तहजीब, संवेदनशीलता और व्यवहार में आई नरमी ने सबको चौंका दिया है। सूत्र बताते हैं कि नई जिम्मेदारी संभालने के बाद बड़े माननीय ने उन्हें तलब कर साफ शब्दों में समझाया था कि अब पुराना तरीका नहीं चलेगा… जनता के बीच रहना पड़ेगा। बस फिर क्या था… साहब ने खुद को बदलने की मुहिम शुरू कर दी। हालांकि जिले के अंदरूनी हालात अब भी बहुत अच्छे नहीं बताए जाते।
कलेक्टर कार्यालय का स्टाफ अंदर ही अंदर नाराज है।
कुछ कर्मचारी तो खुलकर विरोध की बात तक कर चुके हैं।
प्रशासनिक मुखिया भी उन्हें खास पसंद नहीं करते, लेकिन इसके बावजूद चौथी बार जिले की कमान मिल जाना अपने आप में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
इंदौर में बने उनके आलीशान मकान और सत्ता में मजबूत पकड़ की चर्चा भी कम नहीं होती।
कहा जाता है कि साहब इतने “सेट” हैं कि उन्हें न ट्रांसफर का डर है और न कार्रवाई का भय।
फिलहाल विंध्य में उनकी नई “संस्कारी और जनहितैषी” छवि चर्चा में है।
अब देखना यह होगा कि यह बदलाव स्थायी है…
या फिर सिस्टम की जरूरत के हिसाब से पहना गया एक नया प्रशासनिक मुखौटा।
