🔴 भूमि हस्तांतरण के आदेश मे पूर्व कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव कीअनुमति संदिग्ध के घेरे में...!
🛑 आदिवासी जमीनों की फाइलों से बड़ा खुलासा..!
🛑 इंदौर में आदिवासी भूमि हस्तांतरण पर उठे बड़े सवाल..!
🛑 संरक्षण के दावों के बीच जमीन हस्तांतरण की परतें खुलीं..!
🛑 वर्षों पुराने रिकॉर्ड ने खोले जमीन के फैसलों के राज..!
🛑 खसरा नंबर से आदेश तक: आदिवासी जमीनों का पूरा रिकॉर्ड सामने..!
🔴 पूर्व कलेक्टर साहब ने तो ST की जमीन को रेउड़ी की तरह नॉन ST को बेचने की परमिशन दे डाली, भू माफिया, दलाल पर गजब के मेहरबानी दिखाई पूर्व कलेक्टर साहब ने..!
🔴 वर्ष 2008–10 के रिकॉर्ड में कई विक्रय अनुमतियां, दस्तावेज़ों ने खड़े किए गंभीर प्रश्न..!
Mahfooz khan:-
इंदौर | आदिवासी समाज की जमीनों की सुरक्षा के लिए कानून बने, संरक्षण के दावे किए गए और यह व्यवस्था की गई कि विशेष परिस्थितियों में ही कलेक्टर अनुमति के बाद भूमि हस्तांतरण हो सके। लेकिन अब इंदौर जिले से सामने आए वर्षों पुराने रिकॉर्ड और अनुमति आदेशों ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जो प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर सकते हैं।
दस्तावेज़ों में वर्ष 2008–09 और 2009–10 के दौरान कई भूमि विक्रय प्रकरण दर्ज दिखाई देते हैं। जिसमे अनुसूचित जनजाति की जमीन गैर अनुसूचित जनजाति को बेचने की अनुमति रेउड़ी के तरह तत्कालीन कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव ने डाली। जिस रिकॉर्ड में विक्रेता, खरीदार, सर्वे नंबर, कुल रकबा, आदेश तिथि और अनुमति देने वाले अधिकारियों के नाम तक दर्ज हैं। इन रिकॉर्ड में कई मामलों में तत्कालीन कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव के आदेश दर्ज दिखाई देते हैं।
रिकॉर्ड की फाइलों से निकले नाम और जमीन का सफर
राऊखेड़ी में शंकरलाल बालजी खराड़ी की भूमि, सर्वे नंबर 65/1, रकबा 0.324 हेक्टेयर, खरीदार के रूप में पार्श्वनाथ डेवलपर्स (श्री बी.पी. ढाका) का नाम दर्ज है। आदेश दिनांक 10 दिसंबर 2008 है।
कोडिया में विक्रम पिता श्रीराम की भूमि, सर्वे नंबर 468, 469, 472, कुल रकबा 2.210 हेक्टेयर, खरीदार रमेश पिता रतनलाल एवं थावरीबाई रतनलाल दर्ज हैं।
गलोण्डी में राजाराम मदनलाल की भूमि, सर्वे नंबर 194/1, रकबा 0.704 हेक्टेयर, खरीदार अंकित पटेल दर्ज हैं।
काचरोट में भोला पिता नानूराम भील की भूमि, सर्वे नंबर 31/1/2 और 31/1/4, कुल रकबा 1.538 हेक्टेयर, खरीदार जगदीश पिता गुलाबसिंह दर्ज हैं।
रामपुरिया खुर्द में प्रेमाबाई राधाकिशन की भूमि जितेंद्र जाट के नाम दर्ज प्रकरण में दिखाई देती है, जबकि दूसरे प्रकरण में दुलीचंद बृजलाल की भूमि इंदौर प्रॉपर्टी प्रा. लि. के नाम दर्ज है।
टीही में सालगराम मंगाजी एवं अन्य का प्रकरण 7.121 हेक्टेयर रकबे के साथ रिकॉर्ड में दर्ज है।
रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2008–09 में कुल 15.364 हेक्टेयर भूमि से जुड़े प्रकरण दर्ज दिखाई देते हैं।
अब सवाल सिर्फ जमीन के नहीं, प्रक्रिया के भी..!
👉 क्या हर मामले में विशेष परिस्थितियों का परीक्षण हुआ?
👉 क्या आदिवासी भूमि संरक्षण की मूल भावना का पालन हुआ?
👉 क्या अनुमति देने से पहले पूरी प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई?
👉 क्या इन सभी मामलों की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए?
दस्तावेज़ सामने आने के बाद अब यह मामला केवल पुराने रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रह गया है। जानकारों का कहना है कि यदि रिकॉर्ड और प्रक्रिया के बीच कोई विसंगति है, तो इसकी परत-दर-परत जांच होना जरूरी है।
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से संज्ञान लेने की उम्मीद
अब प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि पूरे मामले की फाइलों की दोबारा समीक्षा होनी चाहिए और रिकॉर्ड का विधिवत परीक्षण कराया जाना चाहिए। निगाहें अब मोहन यादव सरकार और मुख्य सचिव अनुराग जैन पर टिकी हैं। बड़ा सवाल यह है कि क्या वर्षों पुराने इन रिकॉर्ड और अनुमति आदेशों की विस्तृत जांच कराई जाएगी, या मामला केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगा? आने वाले समय में प्रशासनिक स्तर पर उठाए जाने वाले कदम इस पूरे प्रकरण की दिशा तय कर सकते हैं।
सहर सूत्र का दावा: कई जिलों के दस्तावेज़ों की जांच जारी, आगे भी होंगे खुलासे
सहर सूत्र के अनुसार मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से प्रशासनिक और भूमि संबंधी रिकॉर्ड एकत्र किए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि कई मामलों से जुड़े दस्तावेज़ों का अध्ययन जारी है और आने वाले समय में अलग-अलग जिलों के प्रशासनिक फैसलों, भूमि प्रकरणों और रिकॉर्ड से जुड़े नए तथ्य सामने लाए जाएंगे। सहर सूत्र का कहना है कि यदि रिकॉर्ड में किसी प्रकार की अनियमितता, प्रक्रिया में विसंगति या नियमों से अलग निर्णय सामने आते हैं, तो उनसे जुड़े दस्तावेज़ क्रमवार सार्वजनिक किए जाएंगे।
