➡️ 35 साल की शर्त, तीन-तीन रिकॉर्ड और शहडोल की राजनीति में उठता धुआं..!
➡️ एक चेहरा, कई रिकॉर्ड और जन्मतिथि के अलग-अलग दावे अब शहडोल की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गए..!
➡️ जब किसी पद के लिए उम्र पात्रता का पैमाना बने, तब रिकॉर्ड की हर तारीख सवालों के घेरे में आ जाती है..!
➡️ क्या रसूख और दस्तावेजों पर उठते सवालों के बीच तय होगी पद की राह? शहडोल की सियासत में अब चर्चा इस बात की है कि पात्रता का फैसला नियम करेंगे या प्रभाव..!
"उम्र के गणित से पहले भी जानू छाबड़ा को लेकर विभिन्न विवादों की चर्चाएं राजनीतिक हलकों में उठती रही हैं। हालांकि इन मुद्दों को लेकर संगठन का क्या रुख रहेगा और पात्रता के मानकों पर क्या फैसला होगा, इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा।"
शहडोल। युवा मोर्चा की सियासत में इन दिनों एक सवाल सबसे ज्यादा गूंज रहा है, क्या युवा मोर्चा की कुर्सी तक पहुंचने के लिए उम्र के गणित का सहारा लिया गया? जिला अध्यक्ष पद की दौड़ में चर्चित नाम जानू सिंह छाबड़ा को लेकर जन्मतिथि संबंधी दस्तावेजों पर सवालों की आंधी चल पड़ी है।दस्तावेजों में सामने आ रहे अलग-अलग विवरणों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। मामला सिर्फ एक पद का नहीं, बल्कि नियम, पात्रता और संगठन की विश्वसनीयता तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।
एक चेहरा... तीन जन्मतिथि? आखिर सच किस फाइल में कैद है?
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, समग्र आईडी में जन्मतिथि के रिकॉर्ड में समय-समय पर बदलाव होने का दावा किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार पहली जन्मतिथि 01/12/1988, उसके बाद 01/12/1989 और फिर 01/12/1991 दर्ज होने की बात सामने आ रही है।
वहीं आधार कार्ड में जन्मतिथि 01/12/1989 दर्ज होने की बात कही जा रही है। इसके अलावा वर्ष 2021 की मतदाता सूची में उम्र का विवरण भी अलग होने का दावा किया जा रहा है। अब सवाल उठ रहे हैं, कि एक व्यक्ति, अलग-अलग दस्तावेज और अलग-अलग उम्र आखिर क्यों?
35 साल की दीवार और सियासत का गणित
सूत्रों के अनुसार, युवा मोर्चा के पदाधिकारियों के लिए उम्र सीमा निर्धारित है। ऐसे में दस्तावेजों के रिकॉर्ड पर उठ रहे सवालों ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पात्रता से जुड़े मामलों पर यदि स्पष्टता नहीं आती, तो इससे संगठन को असहज सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
सियासी परिवार, बढ़ी चर्चा
इंदरजीत सिंह छाबड़ा पूर्व में जिला अध्यक्ष रह चुके हैं, जबकि रविंदर कौर छाबड़ा वर्तमान में नगर पालिका अध्यक्ष हैं। इसी कारण पूरे मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है।
संगठन की साख पर भी उठी फुसफुसाहट
स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा भी सामने आ रही है कि यदि पात्रता और दस्तावेजों को लेकर विवाद पैदा होता है, तो भविष्य में यह संगठन के लिए असहज स्थिति बन सकता है।
सबसे बड़ा सवाल
क्या यह सामान्य दस्तावेजी संशोधन की प्रक्रिया थी, या फिर इसके पीछे कोई और कहानी छिपी है?
फिलहाल शहडोल की राजनीति में एक सवाल सबसे ज्यादा गूंज रहा है —
“युवा मोर्चा की कुर्सी तक पहुंचने की दौड़ में आखिर असली उम्र कौन सी है?”
